अचानक चक्कर आए, गिरने के बाद हो गई अतिथि विद्वान की मौत :-
' झाबुआ, आलिराजपुर, धार आदि जिलों से अतिथि विद्वान कर रहें परिवार को आर्थिक मदद '
' विगत 15 वर्ष से प्रदेश के विभिन्न महाविद्यालयों में सेवा दे रहे थे '
' डॉ. सूर्य प्रकाश साकेत जंतु विज्ञान विषय के थे अतिथि विद्वान '
प्रदेश के विभिन्न शासकीय महाविद्यालयों में सेवा देने वाले अतिथि विद्वानों का भविष्य और जीवन सरकार की अनदेखी से अंधकारमय है। जी हां सरदार वल्लभ भाई पटेल शासकीय महाविद्यालय देवतालाब जिला मंऊगंज में जंतु विज्ञान विषय में कार्यरत अतिथि विद्वान डॉ. सूर्य प्रकाश साकेत को 11 फरवरी 2026 को महाविद्यालय में ही अचानक चक्कर आए और वे गिर पड़े। डॉक्टर के पास ले गए, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। साकेत 38 वर्ष से अधिक आयु के थे और विगत 15 वर्षों से प्रदेश के विभिन्न महाविद्यालयों में अतिथि विद्वान के रूप में सेवा दे रहे थे। उनके चार भाई है, पिता का भी देहांत हो चुका है। पूरे परिवार का पालन-पोषण प्रति कार्य दिवस की अतिथि विद्वान की नौकरी से कर रहे थे। उन्होंने बेहद गरीबी में जीवन यापन करते हुए पीएचडी की उपाधि हासिल की थी। लंबे समय तक अतिथि विद्वान रहने के बाद भी भविष्य अनिश्चित था।
लेकिन सरकार व उच्च शिक्षा विभाग द्वारा ऑन ड्यूटी मौत होने पर अतिथि विद्वान के परिवार को किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता व रोजगार नहीं दिया जाता है। इतना ही नहीं अब तक 50 से 60 अतिथि विद्वान इसी तरह दुनिया से जा चुके हैं। लेकिन उनके परिवार को कोई लाभ नहीं मिल पाया है।
वहीं झाबुआ, आलिराजपुर, धार जिलें के अन्तर्गत महाविद्यालयों में कार्यरत अतिथि विद्वानों में शंकर लाल खरवाडिया, पार्वती भाबर, डॉ. अजय आचार्य, जितेन्द्र कुमार नायक, जितेन्द्र सिंह कौरव, डॉ. मानसिंह चौहान, डॉ. सुनील जाट, डॉ. जुली जैन, डॉ. प्राची शर्मा आदि सहित प्रदेशभर के महाविद्यालयों के अतिथि विद्वान मृत अतिथि विद्वान के परिवार को आर्थिक मदद कर रहे हैं।
मध्य प्रदेश अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह भदौरिया ने इस संबंध में बताया है कि यदि सरकार द्वारा अतिथि विद्वानों के भविष्य लिए ठोस नियम होते तो मृत अतिथि विद्वानों के परिवार को कुछ मिल पाता। ऐसा लगता है कि हमने अतिथि विद्वान बनकर कोई गुनाह कर दिया है। इसलिए सरकार हमारी तरफ ध्यान नहीं दे रही है।
संघर्ष मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी शंकरलाल खरवाडिया ने भी दुखी होकर बताया कि हम भी इंसान हैं। वर्ष 2002 से उच्च शिक्षा विभाग में काम कर रहे हैं। फिर भी सरकार मरने वाले के परिवार कुछ नहीं दे रही है। मेरा मोहन सरकार से अनुरोध है कि अतिथि विद्वानों के लिए जल्द से जल्द हरियाणा पॉलिसी लागू करें और अब तक मृत अतिथि विद्वानों के परिवार के किसी एक सदस्य को नौकरी व आर्थिक सहायता प्रदान करें।



Comments
Post a Comment