नहीं मिला अतिथि विद्वानों को उनका वाजिब हक :-
' एक तरफ घोषणा कर रहे हैं, दूसरी तरफ फॉलेन आउट '
' 25 साल से अतिथि के अतिथि बना रखा है '
नियमित पदों के विरुद्ध प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में अतिथि विद्वान लगातार 25 वर्षों से सेवा दे रहे हैं। इनके लिए सोमवार को उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने भोपाल में पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि अतिथि विद्वानों के लिए हम हरियाणा मॉडल लाएंगे। इस पर विभाग काम कर रहा है। लेकिन उसी दिन शाम को उच्च शिक्षा विभाग ने अंग्रेजी में 160 व भूगोल विषय में 23 पदों पर सहायक प्राध्यापक भर्ती 2022 से चयनितों के आदेश जारी कर दिए। जिससे अतिथि विद्वानों को फॉलेन आउट होकर बेरोजगारी झेलना पड़ेगी। इससे पहले भी इतिहास, हिंदी आदि विषयों की नियुक्ति से अतिथि विद्वान फॉलेन आउट का दंश झेल चुके हैं। सहायक प्राध्यापक भर्ती 2024 में 25 प्रतिशत आरक्षण एक वर्ष अनुभवी व 25 वर्ष अनुभवी को एक जैसा देने से पुराने अतिथि विद्वानों का चयन नहीं हो सका है।
वास्तव में पूर्व शिवराज सरकार में इनकी महापंचायत आयोजित हुई थी। जिसमें इन्हें सेवा से पृथक नहीं करने व नियमित के समान तमाम सुविधाएं देने की घोषणा हुई थी। उस समय वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उच्च शिक्षा मंत्री थे। लेकिन हकीकत यह है कि अब भी अनुभवी अतिथि विद्वानों की स्थिति जस की तस बनी हुई है। नवीन नियुक्ति से पद भर जाने से सैकड़ों अतिथि विद्वान अब भी बेरोजगार है। अब तक की गई घोषणाओं से अतिथि विद्वानों को कोई फायदा नहीं हुआ है। विगत 25 वर्षों से वे अतिथि के अतिथि ही है। सहायक प्राध्यापक भर्ती 2025 का नवीन विज्ञापन भी निकाल दिया गया है। उसमें भी पहले जैसा लाभ दिया जा रहा है।
वहीं लंबे समय से काम करने के कारण अनेकों अतिथि विद्वान 65 वर्ष की आयु भी पार चुके हैं। अनेकों 50 से 60 के बीच चल रहे हैं। एक तरफ उच्च शिक्षा मंत्री इनके लिए घोषणा कर रहे हैं, दूसरी ओर नवीन भर्ती से रोजगार छीन रहे हैं।
अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह भदौरिया ने बताया है कि उच्च शिक्षा विभाग हमारे लिए दिखावे की घोषणाएं जरुर करता है। लेकिन हकीकत में वर्षो तक उनका पालन नहीं करता है।
संघर्ष मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी शंकरलाल खरवाडिया ने भी इस विषय में बताया है कि सरकार ने अब तक हमें हमारा वाजिब हक नहीं दिया है। हजारों अतिथि विद्वान अधेड़ आयु में पहुंच गए हैं। 50 से 60 तो अब तक स्वर्ग सिधार गए हैं। लेकिन सरकार और उनके नुमाइंदे चुपचाप हैं। दिखावे के लिए जवान बन्दे के साथ हमें पीएससी से भर्ती दौड़ाया जा रहा है। जो एक छल ही कह सकते हैं।


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