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इंदौर में स्कूलों की मनमानी पर सख्ती: कॉपी-किताब और यूनिफॉर्म में मोनोपोली पर प्रतिबंध

 *इंदौर में स्कूलों की मनमानी पर सख्ती: कॉपी-किताब और यूनिफॉर्म में मोनोपोली पर प्रतिबंध*

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*कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी  शिवम वर्मा ने जारी किए प्रतिबंधात्मक आदेश*

इंदौर, 12 अप्रैल 2026

जिला प्रशासन ने निजी स्कूलों द्वारा कॉपी-किताब, यूनिफॉर्म और अन्य सामग्री की खरीद में की जा रही अनिवार्यता और एकाधिकार (मोनोपोली) पर सख्त कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी  शिवम वर्मा द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत यह प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किया गया है।

जारी प्रतिबंधात्मक आदेश अनुसार विद्यालय संचालक/प्राचार्य स्कूल में संचालित प्रत्येक कक्षा के लिये अनिवार्य पुस्तकों की सूची विद्यालय की परीक्षा परिणाम जारी होने के पूर्व ही अपने स्कूल की वेबसाईट पर अनिवार्य रूप से अपलोड करेंगे एवं विद्यालयीन परिसर में सार्वजनिक पटल/स्थान पर चस्पा करेंगे। विद्यालय संचालक/प्रचार्य द्वारा विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को पुस्तकें एवं कॉपियां, सम्पूर्ण यूनिफार्म आदि संबंधित स्कूल/संस्था अथवा किसी एक दुकान/विक्रेता/संस्था विशेष से क्रय किये जाने हेतु बाध्य नहीं किया जायेगा। मान्यता नियमों के अन्तर्गत स्कूल की स्वयं की वेबसाईट होना अनिवार्य है। स्कूल के प्राचार्य/संचालक पुस्तकों की सूची की एक प्रति प्रवेशित अभिभावकों को प्रवेश के समय एवं परीक्षा परिणाम के समय आवश्यक रूप से उपलब्ध करायेंगे एवं कम से कम तीन पुस्तक/यूनिफार्म विक्रेताओं का नाम सत्र प्रारंभ होने के दो माह पूर्व वेबसाईट पर अपलोड कराना सुनिश्चित् करेंगे।

विद्यालय संचालक/प्राचार्य विद्यार्थी एवं उनके अभिभावकों को सूचीबद्ध पुस्तकें परीक्षा परिणाम अथवा उसके पूर्व क्रय हेतु बाध्य नहीं करेंगे। अभिभावक पुस्तकों की उपलब्धता के आधार पर 15 जून 2026 तक क्रय कर सकेंगे।

विद्यालय जिस नियामक बोर्ड सी.बी.एस.ई.आई.सी.एस.ई./एम.पी.बी.एस.ई./ माध्यमिक शिक्षा मण्डल आदि से संबद्ध है, उस संस्था के द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम एवं उस पाठ्यक्रम के अन्तर्गत नियामक संस्था अथवा उसके द्वारा विधिक रूप से अधिकृत एजेंसी (यथा एनसीईआरटी, म०प्र० पाठ्य पुस्तक निगम आदि) द्वारा प्रकाशित एवं मुद्रित पुस्तकों के अतिरिक्त अन्य प्रकाशकों/मुद्रकों द्वारा प्रकाशित की जाने वाली पुस्तकों को विद्यालय में अध्यापन हेतु प्रयुक्त किया जाना प्रतिबंधित रहेगा।

विद्यालय संचालक/प्राचार्य सुनिश्चित करेंगे कि उक्त के अतिरिक्त अन्य विषयों जैसे नैतिक शिक्षा, सामान्य ज्ञान, कम्प्युटर आदि की निजी प्रकाशकों/मुद्रकों की पुस्तकें क्रय करने हेतु बाध्य नहीं किया जायेगा।

  विद्यालय संचालक/प्राचार्य/पालक शिक्षक बैठक (P.T.M) सुनिश्चित् करेंगे कि किसी भी स्थिति में पुस्तकों के निजी प्रकाशक/मुद्रक/विक्रेता स्कूल परिसर के भीतर प्रचार-प्रसार हेतु किसी भी स्थिति में प्रवेश नहीं करें।

  विद्यालय संचालक/प्राचार्य विक्रेता द्वारा पुस्तकों के सेट की कीमत बढ़ाने हेतु अनावश्यक सामग्री जो निर्धारित पाठ्यक्रम से संबंधित नहीं है, का समावेश सेट में नहीं किया जायेगा। कोई भी विक्रेता किसी भी कक्षा के पूरे सेट को क्रय करने की बाध्यता नहीं रखेगा। यदि किसी विद्यार्थी को पुरानी किताबें उपलब्ध हों तो उसे जिसकी आवश्यकता है, केवल उन किताबों को विक्रेता द्वारा उपलब्ध कराया जायेगा।

नोट्स बुक (कॉपी) पर ग्रेड, किस्म, साईज, मूल्य, पृष्ठ संख्या की जानकारी स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिए। किसी भी पुस्तक अथवा कॉपी पर विद्यालय का नाम मुद्रित नहीं किया जायेगा तथा इन पर चढ़ाने वाले कवर पर विद्यालय के नाम को मुद्रित नहीं किया जायेगा।

कोई भी विद्यालय दो से अधिक प्रकार की यूनिफार्म निर्धारित नहीं करेगा। ब्लेजर, स्वेटर इसके अतिरिक्त होगा। विद्यालय प्रशासन द्वारा यूनिफार्म का निर्धारण इस प्रकार किया जायेगा कि कम से कम तीन वर्ष तक उसमें परिवर्तन न हो।

*उल्लंघन पर होगी सख्त कार्रवाई*

आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित स्कूल प्रबंधन के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी। 


*कब तक रहेगा प्रभावी*

यह आदेश 12 अप्रैल 2026 से 11 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा और सभी स्कूलों को इसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए हैं।

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