यज्ञ की पूर्णाहुति, आरती,योग संदेश,पौथी की बिदाई,महाप्रसाद भंडारे के साथ कथा सम्पन्न।
बेटमा के समीपस्थ घाटा बिल्लौद के शुभम गार्डन में सात दिवसीय संगीत मय श्रीमद्भागवत कथा परम पूज्य भागवताचार्य पंडित प्रमोद जी व्यास के पावन सानिध्य में सप्तम दिवस की कथा में महाभारत काल के रोचक प्रसंगों में जरासंध वध, शिशुपाल वध के माध्यम से बताया गया कि हमारे कर्म एवं समय के अनुसार जो पूर्व निर्धारित है हमे प्राप्त होता है। जरासंध की मृत्यु भीम के हाथों होनी थी सो हुई।समय बड़ा बलवान है काबा में जब गोपियों को लूटा गया तो वहीं अर्जुन वही बांण धरे के धरे रह गए। इसलिए कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए। सुदामा चरित्र का मार्मिक चित्रण प्रस्तुत करते हुए व्यास पीठ से कहा गया कि मित्रता निस्वार्थ भाव से होनी चाहिए,सच्चा मित्र वही है जो मुसीबत में काम आवे। भगवान श्री कृष्ण ने अपने परम मित्र गरीब सुदामा को गले से लगाने में जरा भी संकोच नहीं किया अपने सिंहासन पर विराजमान कर पेर धोये। बहुत ऐश्वर्य वान बना दिया फिर भी सुदामा को भनक नहीं लगने दी।राजा परीक्षित के श्राप निवारण सहित जन्मेजय का नाग दाह यज्ञ की कथा के साथ भगवान श्री कृष्ण जी का अवसान।
कलयुग में श्रीमद्भागवत जी में ही साक्षात श्रीकृष्ण जी के वास की बात कही गई। यजमान गण श्यामलाल, राजेश,संजय,मनोज, शैलेन्द्र,कमलेश रामलाल, सचिन, जितेन्द्र,राहुल,कशीश,प्रियांश,यश,लवीश,कन्हा, संदीप जायसवाल परिवार ने यज्ञ में आहूतियां दी यज्ञाचार्य पं संजय, सुदीप, अभिषेक,सेलेश, योगेश ने यज्ञ की पूर्णाहुति सम्पन्न करवाई ।गुरू पूजन एवं पोथी पूजन किया गया। यजमान गणों ने महाआरती उतारी।इस अवसर पर पतंजलि योग समिति जिला प्रभारी रामभरोसे वर्मा ने एक्कीस जून अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस पर योग करने का आह्वान किया। श्रीमद्भागवत जी की पौथी की बिदाई समारोह पूर्वक की गई ।विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिसमें बड़ी संख्या में श्रृद्धालुओं ने महाप्रसाद ग्रहण किया। मातृशक्ति एवं श्रृद्धालुओं की गरिमा मय उपस्थिति में सातों दिन भक्ति रस से भरपूर भजनों पर श्रृद्धालु झूम उठे। संगीत राधेश्याम एवं अमन सिसौदिया सादलपुर,मनोहर भैया गोतमपुरा,अतुल चन्देल ने दिया।जायसवाल परिवार घाटा बिल्लौद ने आभार व्यक्त किया।



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