भारत में अवैध गौण खनिज उत्खन मिलीभत? -खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम,1957 में त्वरित संशोधन की आवश्यकता- विकास, पर्यावरण और अगली पीढ़ियों के भविष्य पर मंडराता संकट -समग्र व्यापक विश्लेषण
भारत में अवैध गौण खनिज उत्खन मिलीभत? -खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम,1957 में त्वरित संशोधन की आवश्यकता- विकास, पर्यावरण और अगली पीढ़ियों के भविष्य पर मंडराता संकट -समग्र व्यापक विश्लेषण भारत को खनिज संपन्न राष्ट्र से आगे बढ़कर खनिज संरक्षण और सतत विकास का वैश्विक मॉडल बनने की दिशा में ठोस कदम उठाने की त्वरित आवश्यकता खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 में प्रशासनिक तंत्र, स्थानीय प्रभावशाली तत्वों, खनन माफिया और राजनीतिक संरक्षण के खिलाफ़ विशेष कठोर प्रावधान की आवश्यकता -एडवोकेट किशन सनमुखदास भावनानीं गोंदिया महाराष्ट्र गोंदिया - वैश्विक स्तरपर भारत प्राकृतिक संसाधनों की दृष्टि से विश्व के सबसे समृद्ध देशों में से एक रहा है। रेत, मुरुम, गिट्टी, पत्थर, मिट्टी और अन्य गौण खनिजों ने न केवल देश के निर्माण क्षेत्र को गति दी है बल्कि ग्रामीण और शहरी विकास की आधारशिला भी रखी है।किंतु पिछले कुछ दशकों में जिस तीव्र गति से इन संसाधनों का दोहन हुआ है, उसने एक गंभीर राष्ट्रीय संकट को जन्म दिया है। यह संकट केवल अवैध खनन तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरणीय विनाश, ...