लंबे समय से उच्च शिक्षितों को सरकार ने बना रखा है अतिथि विद्वान :-
' भरोसा देकर भी लगातार करते आए हैं शोषण '
' महापंचायत से भी इनका कुछ भला नहीं हुआ '
प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग में नियमित पदों के विरुद्ध लंबे समय से अतिथि विद्वान सेवा दे रहे हैं। सरकार ने सन 2002 से अब तक इनके पदनाम में परिवर्तन तक नहीं किया है। ये अब भी अनिश्चित फ्यूचर के अतिथि बने हुए है। अब तो उच्च न्यायालय भी यह मान चुका है कि, ऐसे कर्मचारी जो वर्षों तक आवश्यक और नियमित कार्य करते हैं, उन्हें अनिश्चित काल तक कॉन्ट्रैक्ट पर रखना अनुचित और अन्यायपूर्ण है।
लेकिन मध्य प्रदेश में पिछले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले इनकी महापंचायत हुई थी। उसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. मोहन यादव ने इनके लिए अनेकों सौगातें दीं थीं, जो अब केवल घोषणा मात्र बनकर रह गई है। विगत माह में हुई नवीन सहायक प्रोफेसरों की पोस्टिंग और पीएम कॉलेजों में 535 प्रोफेसरों के ट्रांसफर से बाहर हुए अनेकों फॉलेन आउट अतिथि विद्वान विगत डेढ़ माह से बेरोजगार बैंठे हैं। 15 से 18 नवंबर के बीच हो रही द्वितीय अवसर की च्वाइस फिलिंग में नाममात्र के पद ओपन किए गए हैं। अनेकों प्रिंसिपलों ने मनमानी दिखाकर पद नहीं खोलें हैं। इस संबंध में अतिथि विद्वानों द्वारा अनेकों बार उच्च शिक्षा विभाग के अफसरों को पत्राचार, मेल आदि किया गया। किंतु कोई सुनवाई नहीं होती है।
मध्य प्रदेश अतिथि विद्वान नियमितीकरण संघर्ष मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी शंकरलाल खरवाडिया का इस संबंध कहना है कि हमें सरकार और उच्च अधिकारियों ने अनेकों बार अलग - अलग राज्यों की पॉलिसी बनाने का भरोसा दिया। मगर हकीकत में हमारे भविष्य के साथ शोषण करने के अलावा अब तक कुछ नहीं हुआ है। अब तक 50 से ज्यादा अतिथि विद्वान भगवान को प्यारे हो गए हैं।



Comments
Post a Comment